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उपराज्यपाल Manoj Sinha ने किया बड़ा ऐलान! पीड़ित परिवारों की जगीं उम्मीदें, नौकरी, लोन और संपत्ति वापसी का वादा

Satyakhabarindia

Jammu-Kashmir के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में आतंकवाद से पीड़ित परिवारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा मारे गए निर्दोष लोगों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। जो अपराधी दशकों से खुलेआम घूम रहे हैं उन्हें अब न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है जिन्होंने अपनों को आतंकवाद में खोया है।

टोल-फ्री नंबर और प्राथमिकता से नौकरी

एलजी मनोज सिन्हा ने घोषणा की कि आतंक पीड़ित परिवारों की मदद के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा ताकि वे अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकें। साथ ही इन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरियां दी जाएंगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए कि जो केस जानबूझकर दबा दिए गए थे उन्हें फिर से खोला जाए और एफआईआर दर्ज की जाए।

जो संपत्ति छीनी गई, वो अब लौटेगी

एलजी ने एक और बड़ा आदेश दिया कि जिन आतंकवादियों या उनके समर्थकों ने पीड़ित परिवारों की संपत्ति हड़प ली है उन्हें तुरंत खाली करवाया जाए। इस फैसले से कई वर्षों से अपनी ही जमीन और घर से बेदखल परिवारों को बड़ा राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार अब सीधे तौर पर उन लोगों की पहचान करेगी जो निर्दोष कश्मीरियों की हत्या में शामिल थे और अब सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं।

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स्वरोजगार और मुद्रा योजना से मिलेगा सहारा

बैठक में एलजी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन पीड़ित परिवारों के सदस्य अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं उन्हें सरकार की तरफ से आर्थिक मदद दी जाए। मुद्रा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत इन्हें सहायता दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इससे कई पीड़ित परिवारों को रोज़गार का नया रास्ता मिलेगा।

एलजी सचिवालय और मुख्य सचिव कार्यालय में बनेगी विशेष सेल

सरकार ने पीड़ित परिवारों की समस्याओं को सीधे सुलझाने के लिए एलजी सचिवालय में एक विशेष सेल बनाने का फैसला किया है। इसी तरह का एक सेल मुख्य सचिव कार्यालय में भी स्थापित होगा। इस बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी नलीन प्रभात, गृह सचिव चंद्राकर भारती, वित्त सचिव संतोष डी वैद्य और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीदों की नई शुरुआत मानी जा रही है।

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